ॐ पूर्णमिदः पूर्णमिदं पूर्णात पूर्ण मुदच्यते | पूर्णस्य पूर्ण पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते || ~~

यह भी पूर्ण है, वह भी पूर्ण है, पूर्ण में पूर्ण जोड़ने या घटाने पर पूर्ण ही शेष रहता है| गणितज्ञों ने इसे शून्य का वर्णन बताया तो तत्व बेत्ताओं को इसमें आत्मा और परमात्मा ~ की एक रूपता नजर आई| शून्य और अनन्त की एक ही परिभाषा? यही तो अध्यात्म है| ~ ॐ असतो मा सद्गमय....

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