Articles / लेख

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हिन्दू धर्म में हम मंत्र जप के लिए जिस माला का उपयोग करते है, उस माला में दानों की संख्या 108 होती है। शास्त्रों में इस संख्या 108 का अत्यधिक महत्व होता है । माला में 108 ही दाने क्यों होते हैं, इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतषिक  और वैज्ञानिक मान्यताएं हैं। आइए हम यहां जानते है ऐसी ही चार मान्यताओ के बारे में तथा साथ ही जानेंगे आखिर क्यों करना चाहिए मन्त्र जाप के लिए माला का प्रयोग।

महाभारत में जितने भी प्रमुख पात्र थे वे सभी देवता, गंधर्व, यक्ष, रुद्र, वसु, अप्सरा, राक्षस तथा ऋषियों के अंशावतार थे। भगवान नारायण की आज्ञानुसार ही इन्होंने धरती पर मनुष्य रूप में अवतार लिया था। महाभारत के आदिपर्व में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। उसके अनुसार-

शिव के अवतार के साथ यदि महाविद्या का भी वर्णन हो, तब शिव के दस अवतारों की चर्चा की जाती है। यहां पर प्रत्येक अवतार के साथ उनकी शक्ति का वर्णन है। दस महाविद्याओं में शिव की दस शक्तियां आ जाती हैं। विद्या का अर्थ शक्ति भी होता है। अत: दस महाविद्याएं या महाशक्तियां एक ही हैं।

भगवान भोलेनाथ की  दो रूपों में पूजा की जाती है मूर्ति रूप और शिवलिंग रूप में। महादेव का मूर्तिपूजन भी श्रेष्ठ है लेकिन लिंग पूजन सर्वश्रेष्ठ है माना जाता है। हमारे शास्त्रों द्वारा शिवजी सहित किसी भी देवी देवता की खंडित, टूटी-फूटी मूर्ति का पूजन निषेध है तथा ऐसी मूर्तियों को पूजा घर में रखने की मनाही है।  लेकिन शिवलिंग एक अपवाद है।

 

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